Pyar ka mahatw kya hai | Pyar को पाने का सपना हर कोई देखता है |love





 जिनदगी में Pyar को पाने का सपना हर कोई देखता है | उस सपने को पूरा Karana सब कोई चाहता है मैंने bhi किसी से Mohabbat Ki थी बेइनहां खुद से भी जयादाजाने क्यों मुझे उससे  kab Pyar Ho Gaya था  Mai yah नही जानाता बस Mai janata था कि मुझे उससे Pyar था |
लोग कहते है कि जिन्दगी में मोहब्बात सिर्फ एक बार होती है दो बार Nahi | Lekin मुझे फिर से Pyar हो gaya  | ना जाने क्यों ? yah Mujhe nahi Pata.
 लेकिन Mai क्या करू क़ुदरता का खेल ही कुछ अजीब सा हो जाता है Or   चाहते हुए भी कुदरत दो Pyar करने वालो में से एक को दूर कर देती है क्यों कि कहते है अगर रथ का एक पहिया कमजोर हुआ तो रथ का चलना ही मुसकिल हो जाता है |और वह रथ अपने मंजिल तक नही पहुंच पाती वह रस्ते में ही टूट कर बिखर जाती है | जिस तरह से रथ को चलना और टूट कर बिखरना कुदत का खेल है ठीक उसी तरह जिन्दगी में अगर Pyar में जब बिसवास ख़तम हो जाए ना तो प्यार को बच पाना मुसकिल ही हो जाता है |
जब दिल टूटता है तो दिल से आवाज आती है |और दिल सीसे कि तरह चकना चूर हो जाता है और दिल रो-रो के बोलता है



मैंने मोहबत्त की उनसे दिलो जान से भी जयादा  हमें क्या पता था की हाथ छूट जायगा इसी जनम में सोचा था उनहे जनम - जनम तक साथ दुगा हाथ थम के हर मुश्किल पर साथ दुगा लेकिन हमें यह पता नहीं था की हाथ छूट जायगा इसी Janam में  पकड़े थे हाथ  फिर भी हाथ फिसल जायगा सोचा था सठो जनम तक साथ निभाउंगा फिर भी हाथ इसी जनम में फिसल जायगा | Maine उनहे मानाने की कोशिस की हर मोर पर साथ देने का wada किया फिर भी ये नहीं पता था की हाथ फसल जायगा थामे थे हाथ जिंदगी भर के लिए फिर भी हाथ

                                    
इसी जनम में फिसल जायगा आखो में मेरे सपने थे हाथ पाकर के चलने के लिए जिन्दगी भर मई यह सोचा था हाथ पाकर कर साथ चलुगा सातो जनम तक नाजाने क्यों हाथ फिसल गया इसी जनम पर सोचा था मई की हर सूखा दुःख में मई साथ दुगा राह में कितने फाई मुसकिले क्यों हो मई उसे हटा दुगा | पैरो टेल कटे नहीं आने दुगा पैर रखने से पहले उस कटे को हटा दुगा फिर भी ना जाने क्यों इसी जनम में हाथ फिसल जायगा :मैंने मोहब्बत की थी उनसे बेइंतहां रब से भी इतनी मोहब्बत नहीं की जीतनी मोब्बत की मैंने तुमसे इस जहा पर सोचा था की हर मुसकिल में मई तुम्हारा साथ दुगा कदम कदम पर हर मुसकिल को आसान कर दुगा हमें क्या पता था की इसी जनम में हाथ फिसल जायगा |

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